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NTA का बड़ा खुलासा: नागपुर के उम्मीदवार ने खुद चुना था अबू धाबी केंद्र, ऐन वक्त पर बदलाव का किया गया था अनुरोध
ICN24 Newsroom 21 जून 2026, 01:57 am

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने स्पष्ट किया है कि नागपुर के एक उम्मीदवार ने खुद अबू धाबी केंद्र चुना था, लेकिन परीक्षा से 48 घंटे पहले इसे बदलने का अनुरोध किया।
भारत की राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने हाल ही में परीक्षाओं के संचालन में पारदर्शिता और केंद्रों के आवंटन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। एजेंसी ने बताया कि नागपुर के एक उम्मीदवार, जिसका मामला चर्चा का विषय बना हुआ था, ने शुरू में अपने व्यक्तिगत लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करके अंतरराष्ट्रीय परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी का चयन किया था। हालांकि, परीक्षा की निर्धारित तिथि से ठीक 48 घंटे पहले, इस केंद्र को नागपुर में स्थानांतरित करने का एक 'अनौपचारिक अनुरोध' प्राप्त हुआ था।
NTA के अनुसार, उम्मीदवार ने आवेदन प्रक्रिया के दौरान स्वेच्छा से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के केंद्र को प्राथमिकता दी थी। लेकिन 19 जून की शाम को, परीक्षा शुरू होने से केवल दो दिन पहले, एजेंसी को केंद्र बदलने के लिए संपर्क किया गया। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब भारत में नीट (NEET) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी बड़ी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशव्यापी बहस छिड़ी हुई है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों (NRIs) के बच्चे और ऑस्ट्रेलिया में पढ़ रहे भारतीय छात्र भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। परीक्षा केंद्रों के आवंटन में इस तरह के बदलाव और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर उठते सवाल विदेशों में रह रहे उन अभिभावकों की चिंता बढ़ाते हैं, जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए भारतीय शिक्षा प्रणाली पर भरोसा करते हैं। ICN24 से बातचीत में कुछ शिक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय केंद्रों के विकल्प का दुरुपयोग न हो, यह सुनिश्चित करना NTA के लिए एक बड़ी चुनौती है।
एजेंसी ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि लॉगिन डेटा से यह स्पष्ट होता है कि प्रारंभिक चयन उम्मीदवार के स्तर पर ही किया गया था। NTA ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम समय में किए गए अनुरोधों को स्वीकार करना प्रशासनिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इस मामले में की गई कार्रवाई की गहन जांच की जा रही है। इस विवाद ने तकनीकी खामियों और मानवीय हस्तक्षेप की संभावनाओं को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
भारत सरकार और शिक्षा मंत्रालय वर्तमान में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं। इसमें तकनीकी ऑडिट और डेटा विश्लेषण शामिल है। नागपुर-अबू धाबी केंद्र का यह मामला यह भी दर्शाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था का उपयोग या दुरुपयोग किया जा सकता है। आगामी समय में, विदेशों में स्थित केंद्रों के लिए नियमों को और अधिक सख्त बनाए जाने की संभावना है, ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सके।
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