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झज्जर-बहादुरगढ़: मंगल पांडे की प्रतिमा पर ग्रामीणों ने अर्पित की पुष्पांजलि, शौर्य गाथा को किया याद
ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 12:35 pm

झज्जर-बहादुरगढ़ में ग्रामीणों ने शहीद मंगल पांडे की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया और युवाओं से उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ क्षेत्र में राष्ट्रभक्ति का एक अनुपम दृश्य देखने को मिला, जहाँ स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक मंगल पांडे की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम का आयोजन शहीद की गौरवमयी विरासत को याद करने और आने वाली पीढ़ी को उनके साहस से परिचित कराने के उद्देश्य से किया गया था।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने मंगल पांडे की प्रतिमा को माला पहनाई और 'भारत माता की जय' के नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि मंगल पांडे वह चिंगारी थे, जिन्होंने 1857 में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी। उनकी शहादत ने पूरे देश में आजादी की भूख जगाई, जिसके परिणामस्वरूप वर्षों बाद भारत स्वतंत्र हो सका।
ग्रामीणों ने इस अवसर पर वर्तमान समय में राष्ट्रवाद की महत्ता पर भी जोर दिया। स्थानीय बुजुर्गों का कहना था कि आज की युवा पीढ़ी को यह समझने की आवश्यकता है कि हमें यह स्वतंत्रता कितनी मुश्किलों और बलिदानों के बाद मिली है। झज्जर और बहादुरगढ़ का क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से वीरों की भूमि रहा है, और मंगल पांडे जैसे नायकों के प्रति यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि यहाँ के लोग आज भी अपनी जड़ों और इतिहास से गहराई से जुड़े हुए हैं।
इस आयोजन में केवल स्थानीय निवासी ही नहीं, बल्कि पास के गांवों के युवा भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि ऐसे समारोहों का मुख्य उद्देश्य केवल फूल चढ़ाना नहीं है, बल्कि उन आदर्शों को पुनर्जीवित करना है जिनके लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उन्होंने मांग की कि शैक्षणिक संस्थानों में भी मंगल पांडे जैसे क्रांतिकारियों के जीवन पर विशेष चर्चा सत्र आयोजित किए जाने चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। आईसीएम24 (ICN24) के माध्यम से प्रवासी भारतीय अक्सर अपनी ऐतिहासिक जड़ों की ओर मुड़कर देखते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले हरियाणवी समुदाय के लोग अपनी संस्कृति और अपने नायकों के प्रति अटूट श्रद्धा रखते हैं। इस तरह के स्थानीय आयोजन यह दर्शाते हैं कि आधुनिकता की दौड़ के बावजूद, भारत के गांवों में आज भी देशभक्ति का जज्बा कायम है, जो सात समंदर पार बैठे भारतीयों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनता है।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहाँ सभी उपस्थित लोगों ने देश की अखंडता और एकता को बनाए रखने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने इस बात की भी सराहना की कि स्थानीय स्तर पर महापुरुषों की मूर्तियों के रखरखाव और सम्मान के लिए समुदाय स्वयं आगे आ रहा है, जो नागरिक जिम्मेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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